
गोला गोकर्ण नाथ छोटी काशी
जिला संवाददाता प्रमोद कुमार गुप्ता
सप्ताह भर से मीडिया और अखबारों में खबरें चल रहीं हैं लेकिन गोला नगर की सब्जी मंडी और खुटार रोड पर खुलेआम प्रतिबंधित वन्य उपज कटरुआ जो कि बरसात के मौसम में लगभग एक डेढ़ महीना जंगलों में जमीन के अंदर प्रकृति जंगली पशुओं को जब जंगल में कुछ खाने योग्य नहीं बचता तब उपहार स्वरूप प्रदान किया है जिसे जंगली सुअर भालू आदि जीव खाकर अपनी क्षुधा मिटाते हैं लेकिन इस प्रतिबंधित वन्य उपज पर कुछ लोगों ने कब्जा कर मोटा व्यापार करना शुरू कर दिया और जो हजारों रुपए किलो तक महंगे दामों में शहर में बेचा जा रहा । जहां तक अगर नियमों की बात करें तो वन क्षेत्र में आम जनमानस का प्रवेश तक प्रतिबंधित है फिर जंगल के अंदर मीलों दूर इस वन्य उपज को खोदकर लोग कैसे बड़े व्यापारियों तक पहुंचाते हैं और वह इनकी सप्लाई दूरदराज की मंडियों तक करते हैं जहां इसे महंगे दामों में बेचा जाता है। वन विभाग को बराबर खबरें और सूचनाएं उपलब्ध होने के बावजूद आखिर वन विभाग के अधिकारी किसके दबाव में कार्यवाही करने से कतरा रहे हैं। सवाल ये भी है कि वह इस विषय पर अपनी क्यों कुछ कहना नहीं चाहते और क्यों कार्यवाही से कतरा रहे हैं। अभी हाल ही में पत्रकार बंधु गोला रेंज के रेंजर से मिले थे और उन्होंने 24 घंटे का टाइम दिया था कि ठोस कार्यवाही होगी सिर्फ एक दिन पुरानी सब्जी मंडी गोला में वन विभाग द्वारा रेड डालकर और खुदरा विक्रेताओं को भागकर उन्होंने क्यों इतिश्री कर ली आखिर क्यों नहीं पकड़े जा रहे बड़े व्यापारी क्या ये व्यापार वन विभाग की मिलीभगत या किसी की सह पर हो रहा है? जनता पूंछ रही सवाल रेंजर गोला रेंज और डी एफ ओ से वह इसकी जवाबदेही मांग रही है अब देखना यह है कि वह इस पर अपनी चुप्पी तोड़ते हैं कि नहीं और इन कटरुआ माफियाओं पर कार्यवाही होगी या नहीं। क्या इसी तरह अगर वन क्षेत्र में लकड़ी का कटान हो रहा हो तो वह कार्यवाही करती या नहीं?









